दिल को मालूम नहीं
कुछ लिखू ,क्या लिखूं ?
इस गम कैसे पालू मैं
दिल को नहीं मालूम है
सपनो के घर मैं
घर से उन प्यार के महल में
अब वास्तविकता के
ये टूटे खंडहर कैसे संभालू मैं
दिल को नहीं मालूम है
कुछ शब्द कैसे?
जिंदगी की किताब क्या,
लिख कर सब बता लू मैं
दिल को नहीं मालूम है
